Result of Poetry Competition 8th Edition
Category: Hindi

Title: गली-गली भगवान बिठा कर दिल में रखना भूल गया...

 

देख नजारा दुनिया का, दिल फांसी पे झूल गया...

गली-गली भगवान बिठा कर दिल में रखना भूल गया...

 

बैठ के चौराहों में, जो इंसानियत का पाठ पढ़ाता है...

वही शख्स घर में तड़पती माँ को भूल जाता है...

करके गरीबों के भले का प्रदर्शन जो माइक पे घंटों बिताता है...

घर आकर नौकरों को,बेवजह ही चिल्लाता है...

सिखा सिखा कर अच्छी बातें,अपनाना खुद भूल गया...

गली गली भगवान बिठा कर, दिल में रखना भूल गया...

 

क्या बुरा क्या भला है,जो होना था वो होता रहा...

बरसात होती रही रात भर, गरीब पानी में सोता रहा...

ठण्ड में सिकुड़ता रहा,काम का बोझ दिन में ढोता रहा...

रोती की भूख थी, तो बुखार में भी काम होता रहा...

देख के जिस्म की हालत उसकी, दिल मेरा खुद को भूल गया...

गली गली भगवान बिठा कर, दिल में रखना भूल गया...

 

कहने सुनने की बातें, बस कही सुनी ही जाती हैँ...

कथनी-करनी के अंतर में दूरी बढ़ती जाती है..

करो सभी से प्रेम, लोग अक्सर ये कहते रहते हैँ...

मन ही मन में भले करें नफरत और जलते रहते हैँ...

दोतरफा वजूद दुनिया का, कब है चकनाचूड़ हुआ..

गली-गली भगवान बिठाकर दिल में रखना भूल गया...

WINNER

Swayamprabha Rajpoot

Poet's Instagram: https://instagram.com/the_aliens_thoughts

Title: मध्यमवर्गीय की दास्ताँ उसी की ज़ुबानी

 

इतना तो घुन भी नही पिसा होगा,

जितनी मध्यमवर्गीय की हुई है पिसाई।

एक तरफ गहरा कुआँ है तो

दूजी तरफ है गहरी अंधी खाई।

 

नेताओं ने दिये भाषण,

गरीबों को मुफ़्त राशन।

अमीरों को भर भर कर लोन हैं दिये,

पर मध्यमवर्गीय के एक भी घाव नहीं सिए।

 

बीपीएल वालों के महल हैं तन जाते,

आरक्षण के तहत वो सरकारी नौकरी हैं पाते।

पर मध्यमवर्गीय को ना नौकरी है ना घर,

किस तरह बताओ करे वो अब सबर।

 

किसानों का कर्ज़ माफ़ का कर दिया ऐलान,

पर बताओ ज़रा कौन करेगा इस कर्ज़ का भुगतान।

कुछ महँगाई बढ़ाकर और कुछ और कर लगाकर मध्यमवर्गीय से पैसा वसूला जाएगा,

जिसके बदले में उस पार्टी का नेता लोकसभा में अपना बहुमत बनाएगा।

 

गरीबों को बहला फुसलाकर सरकारें हैं बनती रहती,

और मध्यमवर्गीय जनता सब कुछ चुपचाप है सहती।

 

नीरव मोदी,विजय माल्या भाग जाते हैं सरकारी पैसा लेकर,

मध्यमवर्गीय की जेब पर करारी लात देकर।

 

टैक्स बढेगा, ब्याज दर बढ़ेंगी,पेट्रोल, घर के दाम भी बढ़ेंगे,

राजनीतिक खेल में राजनेता नए नए जुमले गढ़ते जाएंगे।

 

पर यह मध्यमवर्गीय बड़ा ही भीरु प्रवृत्ति का होता है,

बस वह बैठकर अपनी किस्मत पर आठ आठ आँसू रोता है।

 

ना लड़ने की है छमता ना जोश दिखाने का है साहस,

इसलिए ही रहा है वो हमेशा ही परबस।

 

बस रोएगा,बड़बड़ाएगा ,

अपनों पर ही अपना गुस्सा दिखायेगा।

अपने जीवन की ख़ुद पतवार बनकर,

आप ही अपनी नैया खेता चला जायेगा।

 

आस से भरा ये मध्यमवर्गीय,

कभी इस पार्टी को ,तो कभी उस पार्टी को,

बस वोट देता चला जायेगा,

हाँ!! इतना कर्तव्य तो वो हमेशा ही निभायेगा, बस निभाता चला जायेगा।

RUNNER UP

श्रीमती किरण अवधेश गुप्ता
Poet's Instagram: https://instagram.com/guptaji_nscb_wale

Top 10 Poets (inclusive of winners)

Title: वृद्धाश्रम

अपनों को उन्नत करने की चाह ने,
आज इस मुक़ाम पर ला खड़ा किया,
ना अपने हैं, ना आशियाना,
वृद्धाश्रम ही मेरा ठिकाना,
सोचा था उनके साथ,
मैं भी उडूँगा,
अपने गम भूल,
सुकून के कुछ पल जियूँगा,
पन, अपने तो आये,
हवा के झोंके की तरहा,
समेटा और चल दिए,
एक मौके की तरहा,
मैं देखता ही रहा,
एक धोखे की तरहा,
जान थी तब तक,
बोझ ढोता रहा,
एक खोते की तरहा,
उम्र ढली, आँखें धुँधलाई,
फेंक दिया, पर कटे तोते की तरहा,  
अपलक, निग़ाहें ढूँढ़ती रहती हैं,
अपनों के निशाँ,
हर आहट पे जागते हैं,
दिल के अरमां,
शायद आ गया मेरे दिल का मेहरबा,
अँधेरे दिल में आस जगती है,
"शकुन" कसमसाती है,
बुझ जाती है,
बिन तेल दीया,
जुं टिमटिमाता है,
जीवन लौ बुझ जाती है,
दीदार को तड़पते - तड़पते,
ऐसा न हो दम ही निकल जाये,
नहीं चाहता रुसवाई का दाग,
उनके माथे पे लग जाये,
मौत कैसे भी नसीब हो लेकिन,
चहनियों की लकड़ी,
तुलसीदल और गंगाजल,
बस, उनके हाथों मिल जाये,
इतनी तमन्ना लिये,
अपलक राह निहारता हूँ,
सांस गले में अटकी,
बखान उन्हीं के गाता हूँ,
कपाल - क्रिया हो बेटे के हाथों,
न चाहते हुऐ भी, यही भ्रम पालता हूँ ||

Poet: शकुंतला अग्रवाल

Title: तुम स्वयं को थाम लेना

 

निशा जब अति घनी हो

भोर की न कोई ध्वनि हो

तुम मत तब निराश होना

'ऐ वीर,तुम स्वयं को थाम लेना

 

साहस जब रौंदा जाये

भय से मन कौंधा जाये

अपने-पराये के द्वंद से

तुम मत तब हताश होना

'ऐ वीर,तुम स्वयं को थाम लेना

 

सिंह के गर्जन सम्मुख

भाग के न होना विमुख

शिकार के श्रृंखलाओं में

तुम मत मुर्दा लाश होना

'ऐ वीर,तुम स्वयं को थाम लेना

 

मुट्ठियों में रेत भर कर

मानव रहता अकड़ कर

असीमित इस ब्रह्मांड में

तुम मत बस आकाश होना

'ऐ वीर,तुम स्वयं को थाम लेना

 

भाग्य को क्यों कोसते हो?

मन को क्यों मसोसते हो?

तुम तो सौभाग्य के भागी हो

तुम मत दुर्भाग्य से नाश होना

'ऐ वीर,तुम स्वयं को थाम लेना

 

जीवन जो पटके धरातल पे

तुम पुनः उठकर धरातल से

कर त्याग अपने क्षुद्र अस्तित्व 

तुम ऊर्ध्व अडिग कैलाश होना

'ऐ वीर,तुम स्वयं को थाम लेना

 

कोई नहीं शत्रु तुम्हारा

तुम ही तुम्हारे शत्रु हो

उस शत्रु से मत परास्त होना

तुम अपने सृजनकारी हो

तुम मत अपना विनाश होना

तुम मत तब निराश होना

'ऐ वीर,तुम स्वयं को थाम लेना

'ऐ वीर,तुम स्वयं को थाम लेना

Poet: Sumantra Aarya

Title: यशोधरा का आक्षेप

सुनो ओ तपस्वी...

तुम्हें कोटिशः प्रणाम।

तुम्हारे इस अकूत ब्रम्हज्ञान का

करती हूँ मैं सम्मान।

किन्तु...

कहाँ था ये ज्ञान

जब ली थी सप्तपदी?

क्यूँ बह गए मेरे नेह में

ज्यों हो कोई बहती नदी?

क्यूँ उलझ गए मेरी वेणी में

क्या मैंने था कहा?

या फिर...

तुम्हारे वैरागी मन पर,

तृष्णा का ताप हावी था हो गया।

कदाचित...

तुम्हारे तथाकथित पुरुषत्व के भीतर

आकांक्षा थी एक नारी की।

सच बोलना...

क्या समागम के उन पलों में भी

वैराग्य तुमपे भारी था,

या...

संतुष्टि के उस चरम पे तुम्हारा

पुरुषत्व मिथ्याचारी था।

क्यूँ ये ज्ञान परम तुम्हारा,

इन्द्रिय सुख के बाद ही जागा?

क्यूँ मुझे भोगने के पश्चात ही

तोड़ा मुझसे नेह का धागा ?

क्यूँ ये वैराग्य...

बाट जोहता रहा,

मेरे उर में तुम्हारे पुष्प के

पल्लवित होने की?

क्यूँ ये राह रहा देखता

रात्रि होने की?

तुम प्रातः भी जा सकते थे

और...

पहले भी जा सकते थे।

क्या आवश्यक था हर इन्द्रिय का

पूर्णतयः सन्तुष्ट होना ?

तुम पहले भी तो ए सन्यासी

जितेंद्रिय हो सकते थे।

एक तुम्हारा अनुसरण कर

और निर्वाण के मोह में,

यशोधराएँ थी तजी गयीं

कितनी ही निर्मोह में।

न न...

कोई आक्षेप नहीं लगा रही

मैं तुम्हारे बुद्धत्व पे,

ये तो मात्र एक जिज्ञासा है,

बुद्धत्व प्राप्त पुरुषत्व से।

मन में न कोई द्वेष है

पर...

प्रश्न अभी भी शेष है।

उन यशोधराओं का दोषी कौन

उनके हित में क्यों जग है मौन??

जो मोक्ष प्राप्ति के पथ पर

इंद्रियों को भोग कर,

ब्रम्हचर्य की ओर अग्रसर।

अपने स्वामी की अपूर्णता को

अपनी छद्म मुस्कान से

पूर्णतः प्रदान करती हैं।

परीकथाओं सरीखी 

अपने जीवन की झाँकी दिखा,

उनके लिए निर्वाण का पथ प्रदर्शित करती हैं।

Poet: Alka Nigam

Title: धैर्य की महिमा

 

धैर्य धर मन, धैर्य धर

विचलित मन जटा समायेगा

मन आवेग नियंत्रित कर

सब संभव हों जायेगा |

 

लक्ष्य प्राप्ति हेतू मन

बंदोबस्त कुछ करना होगा |

कड़वाहट पिके सारी

नीलकंठ बनना होगा |

धर मन इश धर

धैर्य आशा दीप जलायेगा |

मन आवेग नियंत्रित कर

सब संभव हों जायेगा |

निडर सहज सरल भाव से

कांटो पे चलना होगा |

दिन - दिन दिनकर के जैसा,

कड़ी आग में जलना होगा |

मन चल निश्चय कर

तप से ना घबरायेगा |

मन आवेग नियंत्रित कर

सब संभव हों जायेगा |

पीड़ भुलाके सारी मन

तुझको आगे बढ़ना होगा |

चंद पलों का सुख तज के

चिरंजीव बनना होगा |

मन चल अब आगे बढ़

निश्छल मन रंग लाएगा |

 

मन आवेग नियंत्रित कर

सब संभव हों जायेगा | 

Poet: Ruchi Sharma

Title: आराधना

 

शक्ति की उपासना में 

अगोचर अनंत की साधना में

दिव्य हैं अनुभव सभी 

आराध्य की आराधना में 

 

भाव मन से कर समर्पित 

दिव्य चरणों में हूं अर्पित 

ऊर्जा का स्रोत उर में

आर्या अनंता अमेय चित्रित

 

नित नए उत्कर्ष हों

जिस घर माँ सहर्ष हों

तमन्यता से नाम लेते

सफल उनके लक्ष्य हों

 

महिमा के गुणगान से 

आद्या के यशोगान से 

उत्साह से जीवन भरा है

बुद्धिदा के आह्वान से

Poet: Pragya Mishra 

Title: मानव की व्यथा...

मन को माने बुद्धीमाना...और दिल को बोले पागलखाना !!!

मन तो चंचल और परवाना...आता उसको पाठ पढाना।
शोर मचाकर करे वो दंगल...मान गये तो हो अमंगल।
आशाओं का ढेर लगाता...बार बार वो याद दिलाता।
स्वार्थी वो बस तुम्हे बनाता...जीत नही वो हार दिलाता।

दिल तो शांत और है ग्यानी...बोले वो बस राम की वाणी।
धड़कन से वो याद दिलाता...जब तक है वो जीवन दाता।
प्यार ही जीवन, वो समझाता...प्यार की बोली वो सिखलाता।
बार बार वो कभी न कहता...एकाग्र मे ही, हमे सुनाता।

समझ सको तो समझो यारों...

मन तो माया आधीन है होता... विनाश की ओर ही वो लेजाता।
प्यार का केवल दिल से नाता...धीमे स्वर पर मधुर है गाता।
दिल और मानव जीवन साथी...मन को बन्ना है विद्यार्थी।
लक्ष्य को अगर तुम्हे है पाना...मन को दिल का आधीन है होना।

दिल की सुनकर मन मे बोना...अगर जीवन मे जीत है पाना।
दिल की शांति और मन की जोर...लेजावे बस श्रीराम की ओर।

Poet:Ramani Ramaswamy

Title: शिक्षक

 

संसार में जो संसार होते है,

शिक्षक वो शिल्पकार होते है,

 

जलते है धूप में वो अक्सर,

दिमाग़ से तेज़ धार होते है,

 

अत्यंत विषैले तूफान में भी,

आज़ादी का विचार होते है,

 

मिल नही पाते जो इनसे,

वो बदनसीब तार-तार होते है,

  

इज़्ज़त नही करते जो इनकी,

ज़िंदगी मे वो बेकार होते है,

  

कोयला बन जाता है हीरा,

कुछ ऐसे इनके प्रहार होते है,     

 

डूबती नैय्या को बचाने वाले,

यही तो वो मल्हार होते है,

 

मज़िल पाने का जुनून अनंत,

राह मे चाहे ये दो-चार होते है || 

Poet: Dr. Diwakar Pokhriyal

Title: नारी की है पहचान क्या ?

प्रकृति के कुछ नाम है जिससे कुछ जन अनजान है, 

 प्रत्येक जीवन की एक धार है जिसमे एक शक्ती ही आधार है।।

 

 वो क्या है ना जो बोलते ,

 जो हर बात को है तोलते ।

 इस मोल तोल की दुनिया में ,

 इंसानियत को है छोड़ते।।

 

 कुछ मात्र शब्द के प्रचार मे ,

 खोखले रीतियो के दबाव में ,

 तो कभी अहंकार के बहाओ मे ,

 हर रोज़ है ये बोलते नई बोलियाँ।

 बात ये है कुछ नई नही ,

 सदियों से जो बनाती रही मुद्दा यही ,

 नारी की है पहचान क्या,उसका है योगदान क्या।।

नारी से ही जन्मा यहीं,

उसी नारी से ही बुद्धि मिली ।

शक्ती का जो रही आधार है वो ,

हर रूप में साकार है जो ।।

जो कल तक चली थामे उंगली तेरी,

एक बार तू हौसला दिखा उसे ।

हमारे वेद,पुराण,ग्रंथो मे प्रकृती महाशक्ती स्वरूप वही ,

उसकी मुस्कान सी सजेगी फिर दुनिया नई,दुनिया नई ।।

बढ़ती हुयी आव्यश्कतओ मे ,

योगदान का और भी है महत्व बढ़ा।

ममता की मूरत से प्रोमोट हो,

अब सुपर वोमेन का है टैग जुड़ा ।

पर अब भी पडती है आव्यशाक्ता बड़ी ,

ये बात याद दिलाने की ,

नारी की है पहचान क्या,उसका है योगदान क्या।।

विलासिता मात्र की नही अभिव्यक्ति रही, 

चार दिवारो मे अब सिसक्ती नही।

अपनी आवाज को है बुलंद किया ,

सशक्तिकरण का है स्वरूप दिया।

पर कुछ जानवर बैठे है जो समाज में ,

लगाकर घात अपने शिकार का,

कर देते है इंसानियत को छन्नी यही ।

कर देते है आत्मविश्वास पर प्रहार कई ।।

ये बात हमेशा थी यही रुकी, और आज भी है वही थमी ।

समानता की दौड़ में एक जगह तो है बनी कही , 

सम्मानता का भी भाव थोडा खुद मे लेते बुन सही ।

तो कहीं विकास होगा इंसान का,खुशियों भरे जहां का ।।

Poet:Poornima

Like us on Facebook to stay connected and follow us on Instagram